नीट के बगैर मेडिकल कोर्स के विकल्प (Medical Courses Without NEET 2019)
Team Careers, 22 मई 2019
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नीट के बगैर मेडिकल कोर्स के विकल्प 2019– भारत में स्वास्थ्य एक सबसे बड़ा और बहुत तेज़ी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। हालांकि, पूरे मेडिकल सिस्टम में एमबीबीएस डॉक्टर की संख्या अब भी काफी कम है। पर आज भी अगर आप 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान ले रहे हैं, तो ये बात तय हो जाती है कि आपको नीट (NEET) के लिए कठोर परिश्रम करना होगा ताकि आप स्नातक में एमबीबीस की पढ़ाई कर सकें।

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हालाँकि, नीट के अलावा भी कई दूसरे मेडिकल कोर्स हैं, जो आजकल काफी डिमांड में हैं। लेकिन वे क्षेत्र उन उम्मीदवारों के लिए हैं, जो एमबीबीएस को अपना करियर नहीं मानते हैं। इसमें अलाइड मेडिकल कोर्स और वैसे करियर आते हैं, जो मेडिकल सिस्टम को सुचारू रूप से चलने में मदद करते हैं। नीट के अलावा मेडिकल कोर्स के द्वारा अपनाये जाने वाले व्यवसाय हैं- फ्लेबोटोमिस्ट, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट (आहार विशेषज्ञ), सहायक फिजिशियन और काफी कुछ। ये लोग ज़्यादातर डॉक्टर के सहायक के तौर पर काम करते हैं ताकि उनका काम आसान हो सके।

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इस आर्टिकल में उन मेडिकल कोर्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है, जो नीट के बिना की जा सकती है। यही नहीं, यहाँ उन प्रमुख संस्थानों के बारे में भी बताया गया है, जहाँ ये कोर्स उपलब्ध हैं। ये करियर और कोर्स मेडिकल फील्ड से एकीकृत हैं, पर इसमें एडमिशन लेने के लिए नीट परीक्षा पास करने की ज़रुरत नहीं है। अगर आप मेडिकल को करियर के रूप में देख रहे हैं, जो एमबीबीएस/बीडीएस डॉक्टर के सदृश नहीं है। या फिर, मेडिसिन करना चाहते हैं, पर नीट परीक्षा पास नहीं करना चाहते तो आप नीचे दिए गए लिस्ट से नीट के बिना मेडिकल कोर्स का चुनाव कर सकते हैं।

योग्यता

अगर उम्मीदवारों ने 12वीं कक्षा तक भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान (पीसीबी) या फिर भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित (पीसीएम) की पढ़ाई की है, तो वे आसानी से इन मेडिकल कोर्स की पढ़ाई कर सकते हैं। इनमें से कुछ कोर्स तो इस बात को नज़रंदाज़ कर भी किये जा सकते हैं कि 12वीं की परीक्षा कौन-से स्ट्रीम से पास की है। नीचे दिए गए सारे कोर्स और करियर आप्शन की एक समान बात ये है कि ये सब मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं और इन मेडिकल कोर्स और करियर आप्शन को नीट 2019 की परीक्षा में बैठे बिना भी अपनाया जा सकता है।

कॅरियर के अवसर

इस व्यवसाय में कॅरियर के अवसर और आमदनी धीरे-धीरे अनुभव, कार्यकुशलता और योग्यता के साथ बढ़ता है। ये लोग डॉक्टर या रिसर्च करने वालों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं या खुद की प्रैक्टिस भी कर सकते हैं।

नीट के बगैर मेडिकल कोर्स

वैकल्पिक मेडिकल कॅरियर क्षेत्र

कोर्स और अवधि

एडमिशन हेतु आवश्यकता योग्यता

कोर्स कराने वाले संस्थान

व्यावसायिक चिकित्सक

व्यावसायिक चिकित्सक हर उम्र के लोगों की मदद करता है ताकि वह अपनी शारीरिक या मानसिक बीमारी या चोट से उबर कर बेहतर जिंदगी जी सकें। मरीज़ चोट, एक्सीडेंट, काफी दिनों से चली आ रही बिमारी, लकवा, स्ट्रोक, आटिज्म, बुढ़ापे या किसी और वजह से बीमार हो सकता है।

व्यावसायिक चिकित्सक मरीज़ के साथ आमने-सामने बैठकर क्लिनिकल सेटिंग में बात करते हैं, जैसे कि एनजीओ या फिर स्कूल। वह एक्सरसाइज, कार्यात्मक प्रशिक्षण, पर्यावरण पुनर्गठन आदि की मदद पुनर्वास उपकरण की तरह लेते हैं।

व्यावसायिक चिकित्सा में स्नातक (4.5 साल)

रिहैबिलिटेशन में डिप्लोमा (व्यावसायिक चिकित्सा) डीआर (ओटी) (1 साल)

पीसीबी के साथ 12वीं कक्षा

क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर; मनिपाल यूनिवर्सिटी; इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली; राजीव गाँधी पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट, नयी दिल्ली; जामिया हमदर्द, नयी दिल्ली; आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, मुंबई

बायोटेक्नोलोजिस्ट

बायोटेक्नोलोजिस्ट जीव विज्ञान और तकनीक के ज्ञान का संश्लेषण करते हैं और कई उत्पाद और तरीके बनाते हैं, जिससे जीवन जीने में आसानी होती है। इसमें माइक्रोऑर्गानिज्म में जेनेटिक मैनीपुलेशन की पढ़ाई हो सकती है।

बायोटेक्नोलोजिस्ट कई तरीके के वैज्ञानिक सेटिंग में काम करते हैं जिसमें कई कार्यक्षेत्र निहित हैं जैसे खेती, फार्मा, आहार, जेनोमिक्स, रसायन शास्त्र आदि।

बायोटेक्नोलॉजी में विज्ञान स्नातक (3 साल)

पीसीबी/पीसीएम के साथ 12वीं

क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर; जामिया मिलिया इस्लामिया, नयी दिल्ली; फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे; लोयोला कॉलेज, चेन्नई; वीआईटी, वेल्लोर; एसआरएम इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी


बायोमेडिकल इंजिनियर

बायोटेक्नोलॉजिस्ट नेचुरल साइंस और तकनीक के बीच तालमेल के व्यापक क्षेत्र से मतलब रखते हैं, जबकि बायोमेडिकल इंजीनियर दवा का तकनीक से तालमेल की पढ़ाई करते हैं ताकि वह बीमारी का कारण जान सकें, उसका इलाज बना सकें।

बायोमेडिकल इंजिनियरिंग आजकल काफी चलन में है। बायोमेडिकल इंजिनियर रिसर्च लैब से जुड़ सकते हैं या फिर डॉक्टरों या वैज्ञानिकों के साथ मिलकर अपनी क्षमता को दिखाते हुए मेडिकल टेक्नोलॉजी, बायो इन्फार्मेटिक्स सिस्टम को बना सकते हैं।



बायोमेडिकल इंजिनियरिंग में बीटेक (4 साल)



पीसीबी/पीसीएम के साथ 12वीं



एमिटी यूनिवर्सिटी; कारुण्य इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज; वीआईटी वेल्लोर; सत्यभामा इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी


माइक्रोबायोलोजिस्ट (नॉन-क्लिनिकल)

माइक्रोबायोलोजिस्ट हमारे आस पास मौजूद चीज़ों जैसे कि मिट्टी, पानी, खाना, इन्सान और पेड़ पौधों में मौजूद छोटे ऑर्गानिज्म की पढ़ाई करते हैं। वह इस बात का ध्यान रखते हैं कि हम जो खाना खाते हैं और जहाँ रहते हैं वह सुरक्षित हो।

माइक्रोबायोलोजिस्ट रिसर्च वातावरण जैसे कि लैब, फ़ूड इंडस्ट्री, डिस्टिलरीज, खेती में काम कर सकते हैं। वह सरकारी नौकरी भी कर सकते हैं और सही डिपार्टमेंट में सुरक्षा ऑफिसर बन सकते हैं।


माइक्रोबायोलॉजी में विज्ञान स्नातक (3 साल)


पीसीबी के साथ 12वीं


दिल्ली यूनिवर्सिटी; ऑक्सफ़ोर्ड कॉलेज ऑफ़ साइंस, बंगलुरु; मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज, चेन्नई; पंजाब यूनिवर्सिटी; एमिटी यूनिवर्सिटी; दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड पैरामेडिकल साइंसेज

हृदय सम्बन्धी टेक्नोलॉजिस्ट

हृदय सम्बन्धी टेक्नोलॉजिस्ट फिजिशियन की मदद करते हैं ताकि सही समय पर हृदय और रक्त धमनियों से आधारित समस्याओं का निदान और उपचार हो सके। वह मरीजों पर टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और दूसरे हृदय सम्बन्धी प्रक्रिया करते हैं, उनकी फाइल देखते हैं और उनपर ध्यान रखते हैं।

हृदय सम्बन्धी टेक्नोलोजिस्ट हॉस्पिटल और क्लिनिक पर काम करते हैं जहाँ फिजिशियन मौजूद होते हैं। वह टेस्टिंग लैब में भी काम कर सकते हैं।

हृदय सम्बन्धी टेक्नोलॉजी में विज्ञान स्नातक (4 साल)

पीसीबी के साथ 12वीं

क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर; मनिपाल यूनिवर्सिटी; अमृता विश्व विद्यापीठम; हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च

पर्फ्युज़निस्ट

पर्फ्युज़निस्ट स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकार होते हैं जिन्हें ओपेअर्तिओन थिएटर में मौजूद मशीन को चलाना आता है और ये मरीजों को सर्जरी के दौरान ज़िंदा रखते हैं। जैसे कि ओपन हार्ट या लंग सर्जरी के दौरान, जब डॉक्टर ऑपरेशन कर रहे होते हैं, पर्फ्युज़निस्ट इस बात का ध्यान रखते हैं कि पूरे शरीर में खून दौड़ रहा है ताकि दूसरे अंग जीवित रह सकें।

पर्फ्युज़निस्ट सर्जन या दूसरे स्वास्थ्य सम्बन्धी पेशेवरों से सीधे बात करते हैं ताकि वह उनकी मदद क्रिटिकल प्रोसीजर के दौरान कर सकें। ये हॉस्पिटल या क्लिनिकल सेंटर में काम कर सकते हैं।

पर्फ्युज़न टेक्नोलॉजी में स्नातक या कार्डियो पल्मोनरी पर्फ्युज़न टेक्नोलॉजी में विज्ञान स्नातक (3-4 साल)

पीसीबी के साथ 12वीं

मनिपाल यूनिवर्सिटी; पीजीआई चंडीगढ़; जेआई पीएमईआर पुडुचेरी, अमृता विश्व विद्यापीठम; सीएमसी वेल्लोर; जेएसएस अकादमी ऑफ़ हायर एजुकेशन, मायसूर; निम्स यूनिवर्सिटी, राजस्थान

श्वसन चिकित्सक

श्वसन चिकित्सक उन मरीजों का ख्याल रखते हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे मरीज़ हर उम्र के होते हैं, बच्चों से लेकर बूढ़ों तक। ये कई बार उनकी और आघात रोगियों की जान बचाते हैं।

श्वसन चिकित्सक तीव्र देखभाल वाले अस्पताल और क्लिनिकल सेटिंग में काम करते हैं जैसे कि आपातकालीन देखभाल, आईसीयू, नवजात यूनिट आदि।

श्वसन थेरेपी में स्नातक (4 साल)

पीसीबी के साथ 12वीं

सीएमसी वेल्लोर; मनिपाल यूनिवर्सिटी; अमृता विश्व विद्यापीठम; जेएसएस अकादमी ऑफ़ हायर एजुकेशन, मायसूर

न्यूट्रिशनिस्ट (आहारविशेषज्ञ) (स्वास्थ्य रक्षा आहारविशेषज्ञ, खेल आहारविशेषज्ञ आदि)

आहारविशेषज्ञ मरीजों को उनकी हालत और एलर्जी को समझते हुए संतुलित खाने के बारे में राय देते हैं. डायटीशियन के पास डाइट चार्ट बनाने की निपुणता होती है और वह मरीजों के खाने को अच्छी तरह नियंत्रण में ला सकते हैं, जबकि आहारविशेषज्ञ का काम ज़्यादातर स्वस्थ खाने के साथ एक स्वस्थ्य जीवनशैली का प्रचार करना है। डिग्री और अनुभव से कई बार आहारविशेषज्ञ भी डायटीशियन बन सकते हैं।

आहारविशेषज्ञ अपना खुद का काम कर सकते हैं या फिर हॉस्पिटल या क्लिनिक के लिए भी काम कर सकते हैं। वह एक क्षेत्र जैसे कि खेल, स्वास्थ्य रक्षा, फ़ूड टेक्नोलॉजी आदि में पारंगत हो सकते हैं और फिर उचित व्यवसाय से जुड़ सकते हैं।

न्यूट्रीशन और डायटेटिक्स में विज्ञान स्नातक (3 साल); या

क्लिनिकल न्यूट्रीशन और डायटेटिक्स में विज्ञान स्नातक (3 साल); या

ह्यूमन न्यूट्रीशन में विज्ञान स्नातक (3 साल)

12वीं कक्षा

मानव रचना यूनिवर्सिटी, हरियाणा; लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब; आंध्र यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी; मनिपाल यूनिवर्सिटी; माउंट कारमेल कॉलेज, बंगलुरु

मनोवैज्ञानिक (साइकोलोजिस्ट)

मनोवैज्ञानिक लोगों को उनके जीवन की परेशानियों से जूझने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। ये मदद थेरेपी, साइकोएनालिसिस और टेस्ट के तौर पर होती है। जिन मनोवैज्ञानिकों को क्लिनिकल दक्षता प्राप्त है, वह मरीजों को दवाइयां भी बता सकते हैं ताकि उनकी जिंदगी सुधर सके।

मनोवैज्ञानिक हॉस्पिटल, क्लिनिक, स्कूल आदि में काम कर सकते हैं या अपना खुद का काम भी कर सकते हैं।

मनोविज्ञान में स्नातक (3 साल)

12वीं कक्षा

दिल्ली यूनिवर्सिटी; एमिटी यूनिवर्सिटी; क्राइस्ट यूनिवर्सिटी; निम्स यूनिवर्सिटी, राजस्थान

साइटोजेनेटिसिस्ट

साइटोजेनेटिसिस्ट क्रोमोजोम के बारे में पढ़ते हैं और जेनेटिक समस्याओं और बीमारियों को ढूंढ़ते हैं। ये जेनेटिक बीमारियों का पता खून, टिश्यू या शरीर के दूसरे फ्लूइड की मदद से लगाते हैं। वे माइक्रोस्कोपी, फोटोग्राफी, डीएनए तकनीक आदि की मदद जेनेटिक समस्या को ढूँढने में लेते हैं।

साइटोजेनेटिसिस्ट हॉस्पिटल, क्लिनिक और रिसर्च लैब में काम कर सकते हैं और इनका काम होता है नवजात शिशु और दूसरे मरीजों पर टेस्ट करना। ये क्षेत्र आजकल भारत में काफी चलन में है। साइटोजेनेटिसिस्ट में विशिष्टता मास्टर लेवल पर किया जाता है और जो इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं वह स्नातक में जेनेटिक्स या बायोटेक्नोलॉजी डिग्री का चुनाव कर सकते हैं।

जेनेटिक्स में विज्ञान स्नातक (3 साल); या

बायोटेक्नोलॉजी में विज्ञान स्नातक (3 साल)

पीसीबी/पीसीएम के साथ 12वीं

इंस्टिट्यूट ऑफ़ जेनेटिक इंजीनियरिंग, पश्चिम बंगाल; बंगलुरु सिटी कॉलेज; भवंस विवेकानंद कॉलेज; अमृता विश्व विद्यापीठम; एम्स इंस्टिट्यूट, बंगलुरु

ऊपर दिए गए वैकल्पिक मेडिकल करियर के अलावा, कई दूसरे मेडिकल कोर्स हैं जो नीट के बिना किये जा सकते हैं और जो नीचे दिए गए लिस्ट से चेक किये जा सकते हैं:-

  1. एडवांस केयर पारामेडिक

  2. एनेस्थीसिया असिस्टेंट्स एंड टेक्नोलॉजिस्ट

  3. शरीर रचना विज्ञान (नॉन- क्लिनिकल)

  4. असिस्टेंट बिहेवियर एनालिस्ट

  5. बिहेवियर एनालिस्ट

  6. बायोकेमिस्ट्री

  7. बर्न केयर टेक्नोलॉजिस्ट

  8. सेल जेनेटसिस्ट

  9. क्लिनिकल कोडर

  10. क्लिनिकल सोशल वर्कर (काउंसेलर के अलावा)

  11. इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) टेक्नोलॉजिस्ट

  12. सायटोटेक्नोलॉजिस्ट

  13. डायग्नोस्टिक मेडिकल रेडियोग्राफर

  14. डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर

  15. डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट

  16. क्लिनिकल डायटीशियन, फ़ूड सर्विस डायटीशियन सहित डायटीशियन

  17. एकोलोजिस्ट

  18. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (इसीजी) टेक्नोलोजिस्ट या इकोकार्डियोग्राम (इको) टेक्नोलोजिस्ट

  19. इलेक्ट्रोएनसीफालोग्राम (ईईजी) या इलेक्ट्रोन्यूरोडायग्नोस्टिक (ईएनडी) या इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी) टेक्नोलोजिस्ट या न्यूरो लैब टेक्नोलोजिस्ट

  20. आपातकालीन मेडिकल टेक्नोलोजिस्ट (पारामेडिक) या आपातकालीन मेडिकल तकनीशियन- बेसिक

  21. एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी टेक्नोलोजिस्ट

  22. वातावरण बचाव अधिकारी

  23. फॉरेंसिक साइंस टेक्नोलोजिस्ट

  24. स्वास्थ्य शिक्षक जिनके अन्दर आते हैं रोग सलाहकार, डायबिटीज सलाहकार, स्तनपान सलाहकार

  25. हेल्थ इनफार्मेशन मैनेजमेंट असिस्टेंट, मेडिकल सेक्रेटरी,

  26. ट्रांसक्रिप्शन (समेत मेडिकल रिकॉर्ड तकनीशियन या मेडिकल रिकॉर्ड एनालिस्ट)

  27. हेल्थ इनफार्मेशन मैनेजमेंट टेक्नोलॉजिस्ट

  28. हिमैटो- टेक्नोलॉजिस्ट

  29. हिस्टो- टेक्नोलॉजिस्ट

  30. ह्यूमन इमम्युनोडेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) सलाहकार या परिवार नियोजन सलाहकार

  31. इंटीग्रेटेड बिहेवियरल हेल्थ सलाहकार

  32. मेडिकल इक्विपमेंट टेक्नोलॉजिस्ट

  33. मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट

  34. मेंटल हेल्थ सपोर्ट वर्कर्स

  35. मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट (नॉन- क्लिनिकल)

  36. मॉलिक्यूलर जेनेटिसिस्ट

  37. मूवमेंट थेरापिस्ट जिसमें आते हैं कला, नृत्य और मूवमेंट थेरापिस्ट या खेल कूद थेरापिस्ट

  38. न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजिस्ट

  39. ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी ऑफिसर

  40. ऑपरेशन थिएटर (ओटी) टेक्नोलॉजिस्ट

  41. ऑफथाल्मिक असिस्टेंट

  42. ऑप्टोमेट्रिस्ट

  43. फिजिशियन एसोसिएट और असिस्टेंट

  44. फिजियोलॉजी (नॉन- क्लिनिकल)

  45. फिजियोथेरापिस्ट जिसमें आते हैं जेरियाट्रिक फिजिकल थेरापिस्ट, ओर्थोपेडिक फिजिकल थेरापिस्ट, पीडियाट्रिक फिजिकल थेरापिस्ट

  46. पोडियाट्रिस्ट

  47. रेडियोलोजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट या असिस्टेंट (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), कम्प्युटेड टोमोग्राफी (सीटी), मेमोग्राफी)

  48. रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट

  49. स्लीप लैब टेक्नोलॉजिस्ट

    और काफी कुछ और…

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