राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने हाल में एमबीबीएस की सीटों की संख्या बढ़ाए जाने को स्वीकृति प्रदान की लेकिन भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों के छात्रों को इसमें नुकसान होता दिख रहा है। जहां कर्नाटक और महाराष्ट्र में सबसे अधिक क्रमशः 400 और 350 सीटें बढ़ाई गई हैं, वहीं ऐसा लगता है कि देश के तीन सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों की इसमें अनदेखी की गई है।
बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं पर इसे कोई अतिरिक्त सीट नहीं मिली, उत्तर प्रदेश को केवल 50 एमबीबीएस सीटें मिलीं, और पश्चिम बंगाल को सिर्फ 75 एमबीबीएस सीटें प्राप्त हुईं। यहां तक कि एनडीए सहयोगी पार्टी की सरकार वाले आंध्र प्रदेश के खाते में भी केवल 30 सीटें ही आईं।
तमिलनाडु और केरल में बढ़ी हुई सभी सीटें निजी डीम्ड मेडिकल संस्थानों में हैं। यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि क्या तमिलनाडु और केरल की सरकारों द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाए जाने की मांग को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा खारिज कर दिया गया।
राज्य | नए सरकारी कॉलेज में सीट | सरकारी सीट में वृद्धि (मौजूदा कॉलेज) | डीम्ड यूनिवर्सिटी में वृद्धि | कुल वृद्धि |
कर्नाटक | 0 | 400 | 50 | 450 |
महाराष्ट्र | 50 | 0 | 300 | 350 |
मध्यप्रदेश | 200 | 75 | 0 | 275 |
ओडिशा | 200 | 0 | 50 | 250 |
हरियाणा | 200 | 0 | 0 | 200 |
जम्मू और कश्मीर | 0 | 190 | 0 | 190 |
असम | 50 | 125 | 0 | 175 |
तमिलनाडु | 0 | 0 | 150 | 150 |
केरल | 100 | 0 | 0 | 100 |
पंजाब | 50 | 50 | 0 | 100 |
राजस्थान | 100 | 0 | 0 | 100 |
तेलंगाना | 50 | 25 | 0 | 75 |
पश्चिम बंगाल | 0 | 75 | 0 | 75 |
दिल्ली (एनसीटी) | 50 | 0 | 0 | 50 |
गुजरात | 50 | 0 | 0 | 50 |
मेघालय | 50 | 0 | 0 | 50 |
उत्तर प्रदेश | 50 | 0 | 0 | 50 |
आंध्र प्रदेश | 0 | 30 | 0 | 30 |
कुल | 1,200 | 970 | 550 | 2,720 |
बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पहले से ही पर्याप्त सीटें होतीं तो इन राज्यों को सीटें आवंटित न किए जाने की बात को उचित ठहराया जा सकता था। लेकिन बिहार में प्रति दस लाख आबादी पर महज 23 से भी कम डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो कि सबसे कम (भारत के शीर्ष 20 सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में) है। उत्तर प्रदेश में भी प्रति दस लाख आबादी पर 52 डॉक्टर ही हैं। दूसरी ओर, कर्नाटक में प्रति दस लाख आबादी पर 183 डॉक्टर तो तमिलनाडु में 156 और महाराष्ट्र में 92 डॉक्टर हैं।
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क्र.सं. | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | सीट | जनसंख्या (मिलियन में) | प्रति मिलियन जनसंख्या पर सीट |
1 | तेलंगाना | 9,065 | 38.5 | 235.45 |
2 | कर्नाटक | 12,545 | 68.7 | 182.61 |
3 | तमिलनाडु | 12,050 | 77.4 | 155.68 |
4 | केरल | 4,905 | 36.1 | 135.93 |
5 | आंध्र प्रदेश | 6,735 | 52.9 | 127.34 |
6 | जम्मू और कश्मीर | 1,347 | 12.3 | 109.59 |
7 | गुजरात | 7,250 | 73.5 | 98.64 |
8 | महाराष्ट्र | 11,846 | 128.7 | 92.04 |
9 | राजस्थान | 6,476 | 78.2 | 82.85 |
10 | छत्तीसगढ़ | 2,255 | 31 | 72.74 |
11 | हरियाणा | 2,185 | 31.1 | 70.37 |
12 | दिल्ली | 1,497 | 22.3 | 67.13 |
13 | ओडिशा | 2,725 | 42 | 64.88 |
14 | मध्यप्रदेश | 5,200 | 82.3 | 63.16 |
15 | पंजाब | 1,850 | 31.2 | 59.29 |
16 | पश्चिम बंगाल | 5,676 | 100.2 | 56.66 |
17 | असम | 1,650 | 31.2 | 52.88 |
18 | उत्तर प्रदेश | 12,475 | 241 | 51.76 |
19 | झारखंड | 1,055 | 33 | 31.97 |
20 | बिहार | 2,995 | 131 | 22.86 |
ऐसे में कुछ अहम सवाल पैदा होते हैं, वह हैं:
तीन सबसे अधिक आबादी वाले राज्य, जहां डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात बहुत कम है, वह एमबीबीएस सीटों की क्षमता क्यों नहीं बढ़ा रहे?
हम इन राज्यों की चिकित्सा शिक्षा में पर्याप्त निवेश क्यों नहीं कर रहे, ताकि बेहतर स्वास्थ्य पेशेवर तैयार किए जा सकें?
हम इन राज्यों की अनदेखी क्यों कर रहे हैं?
तमिलनाडु और केरल को सरकारी संस्थानों की सीटों के लिए कोई स्वीकृति क्यों नहीं मिली, और सभी अतिरिक्त सीटें केवल निजी एमबीबीएस सीटों के लिए क्यों हैं?
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