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    री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव (Re NEET 2026 Impact on Cutoff): एमबीबीएस कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?
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    • री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव (Re NEET 2026 Impact on Cutoff): एमबीबीएस कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?

    री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव (Re NEET 2026 Impact on Cutoff): एमबीबीएस कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?

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    Nitin SaxenaUpdated on 13 May 2026, 04:16 PM IST
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    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 12 मई को आधिकारिक तौर पर नीट यूजी 2026 को रद्द कर दिया और नीट परीक्षा दोबारा आयोजित करने की पुष्टि की, जिसे अब री-नीट 2026 के नाम से जाना जाएगा। इस फ़ैसले का असर पूरे भारत में 22 लाख से ज़्यादा मेडिकल उम्मीदवारों पर पड़ेगा, और इसने एमबीबीएस दाखिलों को लेकर अनिश्चितता को फिर से बढ़ा दिया है। हाल के वर्षों में, सरकारी एमबीबीएस कटऑफ पहले से ही हाई रही है, और शीर्ष राज्यों में सामान्य श्रेणी के लिए क्लोजिंग मार्क्स 610-650 के पार चले जाते हैं।
    ये भी पढ़ें: री-नीट संभावित डेट

    अब जब री-नीट 2026 की पुष्टि हो चुकी है, तो मुख्य चिंता यह है कि परीक्षा के दोबारा आयोजन के कारण एमबीबीएस कटऑफ और बढ़ेगा या घटेगा। यह आर्टिकल पिछले डेटा, कॉम्पिटिशन लेवल और एग्जाम पैटर्न में बदलाव के आधार पर नीट 2026 के उम्मीद के कटऑफ ट्रेंड्स का एनालिसिस करता है।

    This Story also Contains

    1. नीट कटऑफ ट्रेंड हाल के वर्षों में (NEET Cutoff Trends in Recent Years)
    2. री-नीट 2026 एमबीबीएस कटऑफ को कैसे प्रभावित करेगा? (How will Re NEET 2026 Impact MBBS Cutoffs?)
    3. री-नीट 2026 में एमबीबीएस कटऑफ पर संभावित प्रभाव )(Expected Impact on MBBS Cutoffs in Re NEET 2026)
    4. नीट 2024 ओरिजिनल कटऑफ बनाम री नीट 2024 कटऑफ (NEET 2024 Original Cutoff vs Re NEET 2024 Cutoff)
    री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव (Re NEET 2026 Impact on Cutoff): एमबीबीएस कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?
    री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव

    नीट कटऑफ ट्रेंड हाल के वर्षों में (NEET Cutoff Trends in Recent Years)

    पिछले कुछ वर्षों में नीट यूजी कट-ऑफ में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिली है, विशेष रूप से सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए लगातार कटऑफ बढ़ रही है। कई राज्यों में, जनरल कैटेगरी के आखिरी एमबीबीएस उम्मीदवार को एडमिशन 600 से अधिक नंबर पर मिलता हैं। वहीं, एम्स दिल्ली जैसे टॉप मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए इससे भी ज़्यादा नंबरों की ज़रूरत होती है। यह ट्रेंड एग्जाम स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव के बजाय बढ़ते कॉम्पिटिशन को दिखाता है। नीट क्वालिफ़ाइंग मार्क्स तो काफ़ी हद तक स्थिर रहते हैं, लेकिन एडमिशन कटऑफ़ लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि ज़्यादा स्कोर करने वाले आवेदकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

    नीट यूजी पिछले साल के कटऑफ ट्रेंड्स (NEET UG Past Year’s Cutoff Trends)

    वर्ष

    सामान्य श्रेणी क्वालिफ़ाइंग कटऑफ

    एमबीबीएस सरकारी कॉलेज क्लोजिंग रेंज

    2022

    715–117

    580–630

    2023

    720-137

    600–640

    2024

    720-164

    610–650

    2025

    686-144

    540- 528

    1778650025453

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    री-नीट 2026 एमबीबीएस कटऑफ को कैसे प्रभावित करेगा? (How will Re NEET 2026 Impact MBBS Cutoffs?)

    री-नीट 2026 से एमबीबीएस दाखिलों के लिए मुकाबला और भी कड़ा होने की उम्मीद है, क्योंकि वही छात्र दोबारा इस परीक्षा में शामिल होंगे। नीट के सामान्य प्रयास के विपरीत, अब उम्मीदवार एक बार परीक्षा में शामिल होने के बाद परीक्षा पैटर्न, प्रश्नों के रुझान और समय प्रबंधन की रणनीति के बारे में पहले से ही जानते हैं। यह अतिरिक्त जानकारी कई स्टूडेंट्स को री-नीट 2026 में अपने स्कोर सुधारने में मदद कर सकती है। स्टूडेंट्स दूसरे अटेम्प्ट में बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं क्योंकि अब वे समझ गए होंगे कि कौन से चैप्टर ज़रूरी थे, पेपर कितना मुश्किल था और उन्होंने पहले कहाँ गलतियाँ की थीं। इससे एमबीबीएस सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, विशेष रूप से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ना निश्चित है।

    हालाँकि, 2026 का फ़ाइनल कटऑफ अभी भी री-नीट पेपर के कठिनाई स्तर पर काफी हद तक निर्भर करेगा। यदि पेपर आसान या मध्यम स्तर का है, तो कट-ऑफ हाई रह सकती है, क्योंकि अधिक छात्र हाई मार्क्स की श्रेणी में स्कोर कर सकते हैं। दूसरी ओर, यदि री-नीट 2026 कठिन साबित होता है, तो कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद एमबीबीएस का कटऑफ कम हो सकता है। नीट 2026 के रद्द होने से उम्मीदवारों में तनाव और अनिश्चितता भी पैदा हो गई है, जिसका असर छात्रों के प्रदर्शन पर अलग-अलग तरीकों से पड़ सकता है। नतीजतन, फ़ाइनल कटऑफ का ट्रेंड संभवतः पेपर की कठिनाई, प्रतिस्पर्धा के स्तर और छात्रों के समग्र प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

    री-नीट 2026 में एमबीबीएस कटऑफ पर संभावित प्रभाव )(Expected Impact on MBBS Cutoffs in Re NEET 2026)

    जैसा कि ऊपर बताया गया है, एमबीबीएस कटऑफ पर री-नीट 2026 का प्रभाव मुख्य रूप से दोबारा होने वाली परीक्षा के कठिनाई स्तर और छात्रों के कुल प्रदर्शन पर निर्भर रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि री नीट 2026 के लिए तीन संभावित परिदृश्य हैं। यदि पेपर मूल नीट यूजी 2026 परीक्षा से आसान होता है, तो एमबीबीएस के कटऑफ बढ़ सकते हैं, क्योंकि ज़्यादा छात्र ज़्यादा अंक हासिल कर सकते हैं। यदि पेपर का कठिनाई स्तर मध्यम बना रहता है, तो कट-ऑफ के रुझान पिछले वर्षों के समान ही रह सकते हैं, जिनमें केवल मामूली बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, अगर री नीट 2026 का पेपर कठिन हुआ, तो हाल के एडमिशन ट्रेंड्स की तुलना में नीट कटऑफ मार्क्स कम हो सकते हैं।

    हालांकि, सरकारी कॉलेजों के लिए नीट एमबीबीएस कटऑफ टॉप कॉलेजों के लिए ज़्यादा रह सकता है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राज्यों में, सीमित सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण, नीट कटऑफ ट्रेंड बहुत हाई बने रह सकते हैं।

    नीट 2024 ओरिजिनल कटऑफ बनाम री नीट 2024 कटऑफ (NEET 2024 Original Cutoff vs Re NEET 2024 Cutoff)

    मेडिकल की तैयारी कर रहे कई छात्र अब री नीट 2026 की तुलना नीट 2024 की दोबारा परीक्षा की स्थिति से कर रहे हैं, ताकि यह समझ सकें कि दोबारा परीक्षा के बाद एमबीबीएस के कटऑफ में किस तरह का बदलाव आ सकता है। हालांकि, नीट 2024 की दोबारा परीक्षा केवल कुछ प्रभावित छात्रों के लिए आयोजित की गई थी, न कि पूरे देश के सभी उम्मीदवारों के लिए; फिर भी इससे इस बात का अंदाज़ा मिल जाता है कि दोबारा परीक्षाएँ किस तरह से प्रतिस्पर्धा और अंकों के रुझानों को प्रभावित कर सकती हैं।

    वर्ष 2024 में, मूल परीक्षा में असामान्य रूप से हाई स्कोर और कई 'फुल स्कोर' पाने वाले टॉपर्स देखने को मिले, जिसके कारण कई राज्यों में एमबीबीएस कटऑफ हाई चले गए। ग्रेस मार्क्स और नीट 2024 के पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए विवाद के चलते बाद में प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर एमबीबीएस दाखिलों के लिए कटऑफ कुल मिलाकर ऊंचे ही बने रहे, क्योंकि मुख्य प्रतिस्पर्धा और अंकों के वितरण में कोई खास बदलाव नहीं आया था।

    नीट 2024 के दोबारा हुए एग्ज़ाम के ट्रेंड से पता चला कि दोबारा एग्ज़ाम होने से कट-ऑफ अपने-आप कम नहीं हो जाता। सबसे बड़ा फ़ैक्टर पूरे पेपर की मुश्किल का स्तर और ज़्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या ही रही। दोबारा टेस्ट होने के बाद भी, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए मुक़ाबला काफ़ी कड़ा बना हुआ है।

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि री-नीट 2026 का प्रभाव 2024 की तुलना में अधिक हो सकता है, क्योंकि इस दोबारा होने वाली परीक्षा में 22 लाख से ज़्यादा छात्र शामिल हैं। यदि बड़ी संख्या में छात्र दूसरी कोशिश में अपने स्कोर बेहतर कर लेते हैं, तो नीट 2026 के कटऑफ ट्रेंड ऊंचे बने रह सकते हैं। दूसरी ओर, अगर री-नीट 2026 का पेपर ज़्यादा कठिन होता है, तो कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद MBBS के कटऑफ कम हो सकते हैं।

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