SRM Kattankulathur Dental College and Hospital, Kattankulathur
Ranked #19 by NIRF, NAAC A++ Accredited | Recognized by dental council of India
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी) भारत देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा किया जाता है। इस परीक्षा के माध्यम से हर वर्ष एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS), आयुष (AYUSH) तथा अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं, जिससे यह भारत की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।
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हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में नीट यूजी परीक्षा को लेकर पेपर लीक, नकल कराने वाले गिरोहों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। हाल ही में कथित नीट 2026 पेपर लीक को लेकर हुए विवाद के बाद अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल फिर से उठने लगा है कि आखिर भारत में अब तक कितनी बार नीट का पेपर लीक होने के आरोपों में घिरा है? इस लेख में इसी विषय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से दी गई है।
नीट 2026 से पहले, नीट यूजी का पेपर कई बार लीक हो चुका है; और अब यह भारत की सबसे विवादित, फिर भी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इस लेख में, हमने नीट पेपर लीक की घटनाओं का पूरा इतिहास सांझा किया है। जिसमें पिछले वर्षों में नीट पेपर में क्या हुआ, लीक कैसे हुआ, और उसके बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, शामिल है।
प्रमुख जाँचों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में 2015 से 2026 के बीच नीट यूजी परीक्षा में कम से कम पाँच बड़ी लीक विवाद की घटनाएँ सामने आई हैं।
वर्ष | परीक्षा | मुख्य मुद्दा | परिणाम |
2015 | एआईपीएमटी* | ब्लूटूथ धोखाधड़ी रैकेट | परीक्षा रद्द, दोबारा परीक्षा आयोजित की गई |
2016 | नीट फेज II | अंतर-राज्यीय लीक के आरोप | देश भर में कोई पुनः परीक्षा नहीं कराई गई |
2021 | नीट यूजी | निरीक्षक द्वारा पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह | स्थानीय गिरफ्तारियाँ की गईं |
2024 | नीट यूजी | ओएसिस स्कूल पेपर चोरी | सीबीआई जाँच, सीमित छात्रों के लिए पुन: परीक्षा |
2026 | नीट यूजी | डिजिटल 'गेस पेपर' के ज़रिए बड़े पैमाने पर पेपर लीक | परीक्षा आधिकारिक तौर पर रद्द, नीट 2026 दोबारा कराने का आदेश |
*नोट: पहले नीट यूजी परीक्षा को एआईपीएमटी कहा जाता था, जिसका आयोजन सीबीएसई द्वारा किया जाता था। बाद में एआईपीएमटी की जगह नीट यूजी ने ले ली।
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नीट 2026 के कथित पेपर लीक का मामला भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के इतिहास की सबसे बड़ी विवादों में से एक बन गया है। जांचकर्ताओं ने कथित लीक का पता महाराष्ट्र के नासिक में लगाया, जिसके तार राजस्थान के सीकर तक फैले हुए थे।
जांच रिपोर्टों के अनुसार, एक कूरियर कर्मचारी ने कथित तौर पर प्रश्न पत्रों वाले ट्रंक तक अस्थायी पहुंच उपलब्ध कराई। डिजिटल कॉपियाँ बनाने के लिए पोर्टेबल स्कैनर का इस्तेमाल किया गया, और फिर फ़ाइलों को "शैडो सर्वर" के ज़रिए भेजा गया। लगभग 410 सवालों वाला 150 पन्नों का एक "गेस पेपर" पीडीएफ़, Telegram और WhatsApp ग्रुप के ज़रिए बाँटा गया। इस "गेस पेपर" में से, 140 प्रश्न बिल्कुल वैसे ही थे जैसे आधिकारिक नीट 2026 प्रश्न पत्र में पूछे गए थे।
एनटीए ने 12 मई, 2026 को एनटीए ने आधिकारिक तौर पर नीट यूजी 2026 को रद्द करने की घोषणा की। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है। यह पहली बार है जब एनटीए ने खुद पेपर लीक के आरोपों के चलते आधिकारिक तौर पर NEET परीक्षा रद्द की है।
नीट 2024 विवाद हाल के वर्षों में सबसे ज़्यादा चर्चित परीक्षा घोटालों में से एक बन गया। जांच करने वालों ने पाया कि झारखंड के हजारीबाग में ओएसिस स्कूल से नीट 2024 के क्वेश्चन पेपर गैर-कानूनी तरीके से एक्सेस किए गए थे। इस मामले में स्कूल अधिकारियों, नीट परीक्षा केंद्रों के अधीक्षकों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े समन्वयकों पर आरोप लगाए गए थे।
जांच रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र के बक्से तक पहुंच बना ली गई थी और उसकी डिजिटल प्रतियां बिहार में सुरक्षित ठिकानों पर भेज दी गई थीं। इस घोटाले में शामिल छात्रों ने रातों-रात उत्तर याद कर लिए और अगले दिन परीक्षा में शामिल हुए। बाद में पुलिस ने जले हुए प्रश्न पत्र के कुछ टुकड़े बरामद किए। नीट 2024 पेपर घोटाले की इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हालांकि, देशव्यापी विरोध के बावजूद भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया और केवल 1563 छात्रों के लिए नीट 2024 की दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया।
वर्ष 2021 नीट यूजी विवाद ने परीक्षा केंद्रों के भीतर की कमज़ोरियों को उजागर किया। जयपुर पुलिस ने राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (RIET) परीक्षा केंद्र पर एक 'रियल-टाइम' लीक ऑपरेशन का भंडाफोड़ किया।
जांचकर्ताओं ने पाया कि कथित तौर पर एक इनविजिलेटर ने फिजिक्स और केमिस्ट्री सेक्शन की तस्वीरें लीं और फिर उन तस्वीरों को WhatsApp के ज़रिए बाहर के "सॉल्वर गैंग" को भेज दिया। सॉल्वर गैंग के एक्सपर्ट्स ने किसी दूसरी जगह से पेपर हल किया और फिर सही जवाब चुने हुए उम्मीदवारों को वापस भेज दिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, उम्मीदवारों ने इसके लिए हर एक ने करीब 35 लाख रुपये दिए।
पुलिस ने कई लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें इनविजिलेटर और इसमें शामिल उम्मीदवार भी शामिल थे। हालांकि, अधिकारियों ने इसे एक स्थानीय घटना माना और पूरे देश में नीट की दोबारा परीक्षा कराने का आदेश नहीं दिया।
वर्ष 2016 में एआईपीएमटी परीक्षा को नीट परीक्षा में बदलाव किया गया। चूंकि एआईपीएमटी परीक्षा की जगह नीट यूजी ने ले ली थी, इसलिए एआईपीएमटी परीक्षा (चरण I) में शामिल हुए छात्रों को नीट यूजी परीक्षा (चरण II) में शामिल होकर अपने स्कोर बेहतर करने का अवसर दिया गया। चूंकि यह परीक्षा दो चरणों में आयोजित की गई थी, इसलिए इसमें कई अनियमितताएं सामने आईं।
नीट के दूसरे चरण से पहले, उत्तराखंड पुलिस ने दिल्ली और बिहार से जुड़े एक अंतर-राज्यीय नकल रैकेट के कई सदस्यों को गिरफ़्तार किया। रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों से कथित तौर पर 10 लाख से 30 लाख रुपये तक वसूले गए और उन्हें परीक्षा से पहले लीक हुए प्रश्न पत्र देने का वादा किया गया था। लीक हुए प्रश्न पत्रों को बांटने के लिए कुछ अस्थायी "सेफ़ हाउस" का इस्तेमाल किया गया था।
सीबीएसई (जो उस समय परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था थी) ने किसी भी बड़े पैमाने पर हुई सिस्टम-संबंधी लीक से इनकार किया। अधिकारियों ने दावा किया कि इस रैकेट ने छात्रों को धोखा दिया, क्योंकि लीक हुए पेपर मुख्य रूप से नकली थे। प्रवेश प्रक्रिया बिना किसी राष्ट्रव्यापी पुनर्परीक्षा के जारी रही।
नीट के एकमात्र राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा बनने से पहले, सीबीएसई 'ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट' (एआईपीएमटी) आयोजित करता था। वर्ष 2015 का यह मामला भारत के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक बना हुआ है।
3 मई, 2015 को हरियाणा पुलिस ने कई राज्यों में चल रहे एक बेहद संगठित नकल रैकेट का भंडाफोड़ किया। जांचकर्ताओं ने पाया कि कुछ लोग खास तौर पर डिज़ाइन की गई ऐसी वेस्ट पहन रहे थे, जिनमें माइक्रो-सिम कार्ड और ब्लूटूथ डिवाइस लगे हुए थे।
खबरों के मुताबिक, इस नकल करने वाले गिरोह ने प्रश्न पत्र की डिजिटल कॉपियां लीं और परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद डॉक्टरों और विशेषज्ञों को प्रश्न भेज दिए। इसमें शामिल छात्रों को छिपे हुए ब्लूटूथ उपकरणों के ज़रिए, उसी समय प्रश्नों के हल किए हुए उत्तर मिल गए। बताया जा रहा है कि यह पूरा ऑपरेशन लगभग 10 राज्यों तक फैला हुआ था।
हालांकि अधिकारियों ने दावा किया था कि इस लीक से केवल सीमित संख्या में उम्मीदवारों को ही फ़ायदा हुआ, लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 6 लाख से ज़्यादा छात्रों के लिए पूरी एआईपीएमटी 2015 परीक्षा रद्द कर दी और पूरी तरह से दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया। यह पहली बार था जब नीट यूजी परीक्षा पूरी तरह से रद्द की गई थी।
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